पानी की पुकार|पानी पर कविता|Poem on Save water For Kids

इस कविता को विडियो के रूप देखें और सुने-

पहले स्वछन्द नदी में था,
अब तालाबों में पहुँच गया।
तालाबों से कुवें में पहुँचा,
अब बोतल में सिमट गया।

जब खूब लबालब भरा था मैं,
मनचाहा इश्तेमाल किया।
याद करो जब तुमने मुझको,
बिन मतलब के बर्बाद किया।

मैं तरल स्वर्ण हूँ याद रखो,
जरूरत मात्र निकालो तुम।
अये धरा वाशियों गौर करो,
मैं जल हूँ मुझे बचालो तुम।,

इस कविता को विडियो के रूप देखें और सुने-

थोड़ा तुम मुझे बचाते हो,
बर्बाद कहीं ज्यादा करते।
कभी मिलों, और कारखानों में,
दुरूपयोग मेरा करते रहते।

यूं गाड़ी मोटर धुलते हो,
मेरी लागत का ध्यान नहीं।
बड़े बड़े आयोजन में,
करते मुझको बर्बाद सभी।

पानी मुफ्त में आता है,
मन से ये भरम निकालो तुम।
अये धरा वाशियों गौर करो,
मैं जल हूँ मुझे बचालो तुम।

तुम चाहोगे तो मेरा भी,
अस्तित्व बना रहेगा।
हर पीढ़ी का इंसान तुम्हारा,
शुक्रगुजार रहेगा।

इस कविता को विडियो के रूप देखें और सुने-

मेरे बिन इक दिन भी नहीं तुम,
बगैर तुम्हारे मेरा क्या।
इक इक बूँद बचा लोगे तो,
कल सबका स्वर्णिम होगा।

आने वाली संतानों के भी,
हिस्से में मुझको डालो तुम।
अये धरा वाशियों तुम सबका,
जीवन हूँ मुझे बचा लो तुम।
मैं जल हूँ मुझे बचा लो तुम।

इस कविता को विडियो के रूप देखें और सुने-